यूँ शुरू हुई कहानी
हमारी कहानी
हमारे परिवार तीस वर्षों से वृंदावन की एक ही गली में जन्माष्टमी मनाते आए, और उनमें से अधिकतर बरसों हम एक-दूसरे से बात तक नहीं कर पाए। यह बदला एक चचेरे भाई की शादी में, जब संगीत के बीच बिजली चली गई और पुराने रसिया के बोल जानने वाले हम दो ही अँधेरे में गाते रहे।
फिर दिल्ली और पुणे, सैकड़ों देर रात की बातें, मथुरा के अनगिनत रेल टिकट, और परिवार का एक ग्रुप चैट जिसे हर बात हमसे पहले पता होती थी।
पिछली शरद पूर्णिमा पर, केशी घाट की सीढ़ियों पर, जल में चाँद के बीच, विहान ने पूछा। अनन्या ने सवाल पूरा होने से पहले ही हाँ कह दी।
अब श्री राधा कृष्ण और आप सबके आशीर्वाद से, हम अपना जीवन वहीं से शुरू करते हैं जहाँ से यह शुरू हुआ था: उसी पूरे चाँद तले।


























